अजमेर.काश्तकारों की सुविधा के मद्देनजर राज्य में हरेक पंचायत समिति मुख्यालय पर कम से कम एक तहसील स्थापित करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए राजस्व मंडल द्वारा सह सीमांत करण की कार्रवाई के तहत विभिन्न जिलों से प्रस्तावों को एकत्रित किया जा रहा हैं। एक दो जिलों को छोड़कर सभी जगह से प्रस्ताव मिल चुके हैं, इसके आधार पर तहसीलों की संख्या में बीस का इजाफा हो सकता है।
राजस्व मंडल सूत्रों के अनुसार बजट घोषणा के अनुरूप ग्राम पंचायत के क्षेत्रानुसार पटवार मंडल और पंचायत समिति के क्षेत्रानुसार तहसील कार्यालय स्थापित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में विभिन्न जिलों से प्रस्ताव एकत्रित किए गए हैं। तय मानक के अनुसार एक तहसील में कम से कम 30 पटवार मंडल होने चाहिए।
जनजाति तथा रेगिस्तानी क्षेत्रों में एक पंचायत समिति में पटवार मंडल की संख्या बीस रखी गई है। अब तक जो स्थिति है उसमें कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां दो या तीन पंचायत समिति पर केवल एक ही तहसील कार्यालय है। जबकि कई पंचायत समिति ऐसी हैं जिनके क्षेत्राधिकार में दो तहसील कार्यालय आते हैं।
इसलिए पंचायत समिति क्षेत्रानुसार नए सिरे से सह सीमांत करण की कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में करीबन 15 जिलों से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जहां नए तहसील कार्यालय स्थापित किए जा सकते हैं। इनमें श्रीगंगानगर, धौलपुर, जोधपुर, नागौर, चित्तौड़गढ़, भरतपुर, जालौर, उदयपुर, अलवर, झुंझुनूं व बूंदी शामिल हैं।
ये होगा फायदा
हर पंचायत समिति स्तर पर एक तहसील कार्यालय और हर ग्राम पंचायत पर एक पटवार सर्किल का सीधा फायदा काश्तकारों को मिलेगा।
आम तौर पर पंचायत समितियों की बैठकें एक दिन ही आयोजित होती है।
ऐसे में दो या तीन पंचायत समिति में एक ही तहसील कार्यालय होने से तहसीलदार के लिए असमंजस की स्थिति होती है कि वह किस पंचायत समिति की कार्यवाही में शामिल हो। तहसीलदार की मौजूदगी पंचायत समिति की बैठक में अहम होती है। इसी तरह हर ग्राम पंचायत में पटवार सर्किल होने से काश्तकारों को राजस्व संबंधी कार्य कराने में आसानी होगी।
फैक्ट फाइल
राज्य में तहसील244
राज्य में अतिरिक्त तहसील 7
राज्य में उप तहसील104
नई प्रस्तावित तहसील20
राजस्व मंडल सूत्रों के अनुसार बजट घोषणा के अनुरूप ग्राम पंचायत के क्षेत्रानुसार पटवार मंडल और पंचायत समिति के क्षेत्रानुसार तहसील कार्यालय स्थापित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में विभिन्न जिलों से प्रस्ताव एकत्रित किए गए हैं। तय मानक के अनुसार एक तहसील में कम से कम 30 पटवार मंडल होने चाहिए।
जनजाति तथा रेगिस्तानी क्षेत्रों में एक पंचायत समिति में पटवार मंडल की संख्या बीस रखी गई है। अब तक जो स्थिति है उसमें कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां दो या तीन पंचायत समिति पर केवल एक ही तहसील कार्यालय है। जबकि कई पंचायत समिति ऐसी हैं जिनके क्षेत्राधिकार में दो तहसील कार्यालय आते हैं।
इसलिए पंचायत समिति क्षेत्रानुसार नए सिरे से सह सीमांत करण की कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में करीबन 15 जिलों से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जहां नए तहसील कार्यालय स्थापित किए जा सकते हैं। इनमें श्रीगंगानगर, धौलपुर, जोधपुर, नागौर, चित्तौड़गढ़, भरतपुर, जालौर, उदयपुर, अलवर, झुंझुनूं व बूंदी शामिल हैं।
ये होगा फायदा
हर पंचायत समिति स्तर पर एक तहसील कार्यालय और हर ग्राम पंचायत पर एक पटवार सर्किल का सीधा फायदा काश्तकारों को मिलेगा।
आम तौर पर पंचायत समितियों की बैठकें एक दिन ही आयोजित होती है।
ऐसे में दो या तीन पंचायत समिति में एक ही तहसील कार्यालय होने से तहसीलदार के लिए असमंजस की स्थिति होती है कि वह किस पंचायत समिति की कार्यवाही में शामिल हो। तहसीलदार की मौजूदगी पंचायत समिति की बैठक में अहम होती है। इसी तरह हर ग्राम पंचायत में पटवार सर्किल होने से काश्तकारों को राजस्व संबंधी कार्य कराने में आसानी होगी।
फैक्ट फाइल
राज्य में तहसील244
राज्य में अतिरिक्त तहसील 7
राज्य में उप तहसील104
नई प्रस्तावित तहसील20
