आरपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली राजस्थान प्रशासनिक व अधीनस्थ संयुक्त सेवा प्रतियोगी (आरएएस) परीक्षा में इन पदों को शामिल किया जाएगा। मंडल प्रशासन द्वारा कुछ पद एडहॉक प्रमोशन से भरने की भी तैयारी की जा रही है।
मंडल प्रशासन ने वर्ष 2010-11 के लिए नायब तहसीलदार के रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरने के लिए कुछ माह पूर्व 47 पद की अभ्यर्थना भिजवाई थी। इसके बाद वर्तमान में जिस बैच की ट्रेनिंग चल रही है उसमें से 22 अभ्यर्थी दूसरी नौकरी मिलने से छोड़कर चले गए। इसी तरह 14 अभ्यर्थियों का इस बैच में चयन हुआ था लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। इस तरह सीधी भर्ती के 38 अतिरिक्त पद और उपलब्ध हो गए थे।
पुराने 47 पद में इन 38 पद को जोड़कर मंडल प्रशासन ने इस सप्ताह नई अभ्यर्थना सरकार को भिजवाई है। राज्य में नायब तहसीलदार के वर्तमान में 448 स्वीकृत पद है, इनमें से 165 पद खाली हैं। सीधी भर्ती के अलावा भू अभिलेख निरीक्षकों को एडहॉक प्रमोशन देकर नायब तहसीलदार बनाने की प्रकिया भी शुरू है।
मंडल प्रशासन ने 9 दिसंबर 2011 को सभी कलेक्टरों को पत्र भेजकर भू अभिलेख निरीक्षकों के संबंध में सूचनाएं मांगी थी। इसके तहत उनके सेवा विवरण व जांच कार्रवाई तथा एसीआर से जुड़ी
तमाम जानकारी ली जा रही है।
सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। इसी बीच मंडल ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर एडहॉक प्रमोशन से रिक्त पदों को भरने के लिए मंजूरी मांगी है।
भर्ती के अनुपात को लेकर विवाद
मंडल प्रशासन भले ही रिक्त पदों को भरने के लिए हर स्तर पर कार्रवाई में जुटा है लेकिन पदों की संख्या को लेकर ना तो सीधी भर्ती वाले अभ्यर्थी संतुष्ट है और ना ही एडहॉक प्रमोशन पाने वाले नायब तहसीलदार मंडल की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं।
इस सेवा के पदों पर भर्ती को राजस्थान तहसील सेवा नियम के प्रावधान भी वर्तमान हालात में बेमानी ही नजर आ रहे हैं। इन नियमों के तहत नियम 7 में भर्ती को लेकर प्रावधान है। इसमें साफ तौर पर सीधी भर्ती से साठ प्रतिशत पद भरे जाने होते हैं।
प्रमोशन के जरिए चालीस प्रतिशत पदों पर नियुक्ति होती है। लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा चुकी है। स्वीकृत पदों की स्थिति को देखते हुए 60 व 40 प्रतिशत का अनुपात कहीं से भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
बेरोजगारों की दलील :
नायब तहसीलदार पद पर सीधी भर्ती का सपना संजोए बेरोजगारों का कहना है कि राजस्व मंडल प्रशासन ने प्रमोशन के जरिए इतने पदों पर नियुक्ति दे दी है कि उनके लिए नाममात्र के पद बचे रहते हैं।
उनका कहना है कि स्वीकृत 448 पदों में से अभी 285 पद पर नायब तहसीलदार कार्यरत हैं। इसमें से मात्र 17 पद पर सीधी भर्ती वाले हैं जबकि बाकी बचे 268 पद पर प्रमोशन देकर नायब तहसीलदार बनाए गए हैं।
जबकि स्वीकृत पदों के 40 प्रतिशत मात्र 179 पद होते हैं, उससे ज्यादा तो आज कार्यरत ही हैं। इसके बावजूद एक बार फिर बड़ी संख्या में एडहॉक प्रमोशन से पद भरने की तैयारी की जा रही है।
प्रमोशन की आस में गुजरी उम्र
इधर, प्रमोशन के जरिए नायब तहसीलदार और फिर तहसीलदार बनने का इंतजार करने वाले भू अभिलेख निरीक्षक भी वर्तमान हालात से खफा हैं। उनका अपना तर्क है कि मंडल प्रशासन ने 2004 के बाद रेग्युलर डीपीसी नहीं की है और कामकाज चलाने के लिए एडहॉक प्रमोशन दिए जा रहे हैं।
इन एडहॉक प्रमोशन से उन्हें ना तो वरिष्ठता का लाभ मिलता है और ना ही तहसीलदार पद पर पदोन्नति के लिए रास्ता खुलता है। उनका यह भी कहना है कि सीधी भर्ती वाले तो छह माह से पांच साल के भीतर तहसीलदार पद पर पदोन्नति पा जाते हैं लेकिन उम्र तो पदोन्नति पाने में ही गुजर जाती है।
सरकार को भेजी है अभ्यर्थना
‘सीधी भर्ती से नायब तहसीलदार के 85 पद भरने के लिए सरकार को अभ्यर्थना भेजी गई है।’
मीनाक्षी हूजा, अध्यक्ष, राजस्व मंडल राजस्थान
नियमों से लेंगे हक
‘राजस्व मंडल प्रशासन प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों की भी पालना नहीं कर रहा है। हाईकोर्ट ने रिव्यू डीपीसी के लिए कई बार आदेश जारी किए हैं। हम केवल रेग्युलर डीपीसी के जरिए प्रमोशन चाहते हैं।एडहॉक प्रमोशन से तो सरकार केवल अपना हित साध रही है। एडहॉक प्रमोशन देकर नाममात्र के लिए नायब तहसीलदार बनाने से कोई लाभ नहीं है जब तक स्थायी प्रमोशन नहीं दिया जाए। हमारी लड़ाई जारी है और नियमों के तहत अपना हक लेकर रहेंगे।’
त्रिलोक चंद
प्रांतीय महामंत्री, नायब तहसीलदार एसोसिएशन
source-bhaskar
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